Skip to main content

प्राप्ति एवं भुगतान खाता ( Receipts and Payment Accounts )

प्राप्ति एवं भुगतान खाता ( Receipts and Payment Accounts )

 जैसा कि हम जानते हैं , गैर - व्यापारिक संस्थाएँ वर्ष के अन्त में एक रोकड़ सारांश तैयार करती है भारी सारांश को प्राप्ति - भुगतान खाता कहा जाता है । प्राप्ति - भुगतान खाते का प्रारूप अनानुसार है - 

प्राप्ति - भुगतान खाते का प्रारूप ( Pro - forma of Receipts and Payments Account) 
“ संस्था का नाम "
 प्राप्ति एवं भुगतान खाता 
( Receipts and Payments Acoount ) 
...............,....को समाप्त होने वाले वर्ष का ( For the year ended............) 

प्राप्तियाँ ( Receipts ) 

शेष ला / ग : To balance b / d

 प्रवेश - शुल्क से : To Entrance Fee

 चन्दे से : To Subscriptions

 आजीवन सदस्यता शुल्क से : To life Membership Fee 

दान से : To Donation 

व्याख्यान से : To Lectures

 विनियोग के ब्याज से : To Interest of Investment

 सम्पत्तियों के विक्रय से : To Sale of Assests 

रद्दी कागज के विक्रय से : To Sale of West Paper

 ड्रामा की टिकटों के विक्रय से : _ To Sale of Drama Tickets |

 किराया से : To Rent

भुगतान ( Payment ) 

       Rs .
 वेतन को : By Salaries

 किराया को : By Rent

 बीमा को : By Insurance

 मरम्मत व्यय को : By Repairs Exp .

 पुस्तकों के क्रय को : By Purchase of Books

 फर्नीचर के क्रय को : By Purchase of Furniture

 विद्युत व्यय को : N By Electric Exp .

 विनियोग के क्रय को : - By Purchase of Investmen

 विविध व्यय को : By Sundry Exp . शेष ले / ग : By balance c / d

नोट - 1 . प्राप्ति - भुगतान खाता रोकड़ बही का सारांश है , अत : इस खाते में केवल नकद व्यवहार ही लिखे जाते हैं । 

2 . संस्था में आने वाली रकम प्राप्ति पक्ष में व संस्था से जाने वाली रकम भुगतान पक्ष में लिखी जाती है ।

 3 . इस खाते का शेष डेबिट ही रहता है , अत : डेबिट योग से क्रेडिट योग घटा देने पर खाते का अन्तिम शेष ज्ञात किया जाता है । 

4 . इस खाते में प्रविष्टि के समय पूँजीगत व आयगत मदों में अंतर नहीं किया जाता है । 

5 . प्रारूप में प्रदर्शित मदों की संख्या में संस्था के कार्य की प्रकृति के अनुसार अंतर हो सकता है ।

Comments

Popular posts from this blog

प्राप्ति - भुगतान खाते की विशेषताएँ ( Characteristics of Receipts and Payments Account )

प्राप्ति - भुगतान खाते की विशेषताएँ  ( Characteristics of Receipts and Payments Account )  प्राप्ति - भुगतान खाते की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं -  1 . खाते का प्रकार - प्राप्ति - भुगतान खाता एक वास्तविक खाता ( Real account ) है । अत : इसमें वास्तविक खाते के नियम के अनुसार लेन - देन लिखे जाते हैं ।  2 . खाते का निर्माण - प्राप्ति - भुगतान खाते का निर्माण वित्तीय वर्ष के अन्त में किया जाता है ।  3 . पूँजीगत व आगमगत - प्राप्ति - भुगतान खाते में समस्त नगद लेन - देन चाहे वे पूँजीगत हों या आगमगत , लिखे जाते हैं ।  4 . रोकड़ बही का सारांश - प्राप्ति - भुगतान खाता रोकड बही का सारांश है तथा जिसका निर्माण रोकड़ बही के आधार पर ही किया जाता है ।  5 . खाते का शेष - प्राप्ति - भुगतान खाते का शेष सामान्यत : डेबिट होता है जो वर्ष के अन्त में संस्था में उपलब्ध रोकड़ को प्रकट करता ।  प्राप्ति - भुगतान खाता आर्थिक स्थिति का द्योतक नहीं है ( Receipts & Payment A / c does not show the economic status ) -   प्राप्ति - भुगतान खाते से किसी गैर - व्यापार...

साझेदारी संलेख ( Partnership Deed )

साझेदारी संलेख  ( Partnership Deed )  अर्थ ( Meaning ) — साझेदारी संलेख , फर्म के साझेदारों के बीच किया गया एक ऐसा अनुबन्ध या समझौता है जिसमें साझेदारी के व्यापार को चलाने की शर्तों और नियमों का उल्लेख रहता है । साझेदारी की विशेषताओं में यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि साझेदारी , फर्म के साझेदारों के मध्य अनुबन्ध है , जो कि लिखित या मौखिक हो सकता है । अनुबन्ध का लिखित होना साझेदारों के हित में होता है , क्योंकि भविष्य में होने वाले विवादों पर अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार उसका निपटारा आसानी से किया जा सकता है ।  साझेदारी संलेख की प्रमुख बातें -  साझेदारी संलेख में प्राय : निम्नलिखित बातों का स्पष्ट उल्लेख होता है -   ( i ) फर्म का नाम एवं पता । ( ii ) साझेदारों के नाम एवं पते । ( iii ) व्यवसाय का क्षेत्र एवं व्यवसाय का स्वरूप । ( iv ) साझेदारों की अवधि । ( v ) साझेदारों की पूँजी एवं प्रत्येक साझेदार का फर्म में हिस्सा । ( vi ) पूँजी लेखों को रखने की विधि । ( vii ) लाभ - हानि का अनुपात । ( viii ) साझेदारों द्वारा ऋण का लेना तथा देना । ( ix ) साझेदार द्वार...

स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता ( Memorandum Revaluation Account )

स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता ( Memorandum Revaluation Account ) - नये साझेदार के प्रवेश पर जब सभी साझेदार यह निर्णय करें कि सम्पत्ति व दायित्व अपने प्रारम्भिक मूल्य पर ही दिखाये जायेंगे अर्थात् पुनर्मूल्यांकन के बाद के मूल्य पर नहीं दिखाये जायेंगे तब स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता बनाया जाता है । यह खाता दो भागों में बँटा होता है इसके पहले भाग में पुनर्मूल्यांकन खाता की तरह लेखांकन किया जाता है तथा दूसरे भाग में पहले भाग के विपरीत दिशा में लेखे किये जाते हैं , अर्थात् जिन लेखों को पहले भाग में डेबिट किया । गया वे क्रेडिट में और जो लेखे क्रेडिट में हैं वे डेबिट में लिखे जाते हैं । इस खाते के पहले भाग का शेष पुराने साझेदारों के पुराने अनुपात में उनके पूँजी लेखों में अन्तरित किया जाता है तथा दूसरे भाग का शेष नये सहित सभी साझेदारों के उनके नये अनुपात में अन्तरित कर दिया जाता है ।