स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता ( Memorandum Revaluation Account ) - नये साझेदार के प्रवेश पर जब सभी साझेदार यह निर्णय करें कि सम्पत्ति व दायित्व अपने प्रारम्भिक मूल्य पर ही दिखाये जायेंगे अर्थात् पुनर्मूल्यांकन के बाद के मूल्य पर नहीं दिखाये जायेंगे तब स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता बनाया जाता है । यह खाता दो भागों में बँटा होता है इसके पहले भाग में पुनर्मूल्यांकन खाता की तरह लेखांकन किया जाता है तथा दूसरे भाग में पहले भाग के विपरीत दिशा में लेखे किये जाते हैं , अर्थात् जिन लेखों को पहले भाग में डेबिट किया । गया वे क्रेडिट में और जो लेखे क्रेडिट में हैं वे डेबिट में लिखे जाते हैं । इस खाते के पहले भाग का शेष पुराने साझेदारों के पुराने अनुपात में उनके पूँजी लेखों में अन्तरित किया जाता है तथा दूसरे भाग का शेष नये सहित सभी साझेदारों के उनके नये अनुपात में अन्तरित कर दिया जाता है ।
प्राप्ति - भुगतान खाते की विशेषताएँ ( Characteristics of Receipts and Payments Account ) प्राप्ति - भुगतान खाते की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं - 1 . खाते का प्रकार - प्राप्ति - भुगतान खाता एक वास्तविक खाता ( Real account ) है । अत : इसमें वास्तविक खाते के नियम के अनुसार लेन - देन लिखे जाते हैं । 2 . खाते का निर्माण - प्राप्ति - भुगतान खाते का निर्माण वित्तीय वर्ष के अन्त में किया जाता है । 3 . पूँजीगत व आगमगत - प्राप्ति - भुगतान खाते में समस्त नगद लेन - देन चाहे वे पूँजीगत हों या आगमगत , लिखे जाते हैं । 4 . रोकड़ बही का सारांश - प्राप्ति - भुगतान खाता रोकड बही का सारांश है तथा जिसका निर्माण रोकड़ बही के आधार पर ही किया जाता है । 5 . खाते का शेष - प्राप्ति - भुगतान खाते का शेष सामान्यत : डेबिट होता है जो वर्ष के अन्त में संस्था में उपलब्ध रोकड़ को प्रकट करता । प्राप्ति - भुगतान खाता आर्थिक स्थिति का द्योतक नहीं है ( Receipts & Payment A / c does not show the economic status ) - प्राप्ति - भुगतान खाते से किसी गैर - व्यापार...
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