अन्तिम चिट्ठा तैयार करना ( Preparation of Closing Balance Sheet )
प्रारम्भिक पूँजी ज्ञात कर लेने के पश्चात् अन्तिम चिट्ठा तैयार किया जाता है । यह चिट्ठा अन्तिम चिट्ठा इसलिए कहलाता है चूँकि यह एक विशेष अवधि के अन्तिम दिवस पर संस्था की आर्थिक स्थिति का चित्रण प्रस्तुत करता है । जैसा कि हम जानते हैं चिट्टे के दो पार्श्व होते हैं दायित्व और सम्पत्ति । दायित्व पार्श्व में पूँजी के साथ अन्य दायित्वों को तथा सम्पत्ति पार्श्व में अन्तिम रोकड़ शेष के साथ अन्य सम्पत्तियों को प्रस्तुत किया जाता है । अध्ययन की सुविधा के लिए प्रत्येक पार्श्व में लिखी जाने वाली मुख्य मदों को निम्नांकित प्रारूप में दर्शाया गया है -
चिट्ठा ( Balance Sheet )
[................वर्ष को ( As on . . . . . . . . .(]
दायित्व ( Liabilities )
पूँजी ( Capital ( 1 ) )
( + ) आय आधिक्य( Surplus )
( - ) व्यय आधिक्य ( Deficit ) अदत्त व्यय [ Outstandi . Exp . ( 2 ) ]
अग्रिम आय [ Adva . Income ( 3 ) ]
कोष ( Fund ( 4 ) )
सम्पत्तियाँ ( Assets )
रोकड़ शेष / बैंक शेष ( अन्तिम ) ( Cash Balance / Bank Balance ) |
विनियोग ( Investment )
( + ) अप्राप्त ब्याज ( Unearned Interest )
अप्राप्त चन्दा , दान आदि ( 5 )
( O . S . Sub . , Donation etc . ) पूर्वदत्त व्यय ( Prepaid Exp . ( 6 ) )
उपस्कर पुराना ( 7 )....
( Old Furniture )
( + ) नया क्रय ( New purchase ) : ( - ) ह्रास ( Depreciation ) भवन ( Buildings )
( - ) ह्रास ( Dep . )
नोट -
1 . पूँजी में यदि आय का आधिक्य हो तो जोडना होता है और यदि व्यय का आधिक्य हो तो घटाना होता है ।
2 . अन्तिम तिथि पर जिन व्ययों का भुगतान करना बाकी होगा , वे सभी व्यय अदत्त व्यय होंगे ।
3 . आगामी वर्ष की आय यदि चालू वर्ष में प्राप्त हो जाती है तो ऐसी आय अग्रिम प्राप्त आय होगी ।
4 . संस्था द्वारा निर्मित संचय विशेष प्रयोजन के लिए होता है जिसे कोष कहा जाता है , जैसे - सांस्कृतिक कार्यक्रम कोष , भवन कोष , क्रीड़ा कोष आदि ।
5 . अंतिम तिथि पर जिन मदों से आय प्राप्त करनी है , अप्राप्त आय कहलाती है ।
6 . ऐसे व्यय जिनका सम्बन्ध आगामी वर्ष से होता है , पूर्वदत्त व्यय कहलाते हैं ।
7 . अन्तिम तिथि पर पुरानी सम्पत्तियों के मूल्य में क्रय की गई सम्पत्ति का मूल्य जोड़ कर ह्रास घटाना होता है ।
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