Skip to main content

गैर - व्यापारिक संस्थाएँ ( Non - trading Concerns )

गैर - व्यापारिक संस्थाएँ ( Non - trading Concerns )

आशय ( Meaning ) - मनुष्यों के इस समाज में कुछ व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह ऐसा भी है जो मानव कल्याण व परोपकार से सम्बन्धित कार्यों को संचालित करता है , ऐसे व्यक्ति या उनके समूह को ही गैर - व्यापारिक संस्थाएं कहा जाता है । चूँकि इन संस्थाओं की स्थापना का उद्देश्य लाभार्जन करना नहीं है , इसलिए इन्हें गैर व्यापारिक या अव्यापारिक संस्थाएँ कहते हैं । अस्पताल , शिक्षण संस्थाएँ , पुस्तकालय , मनोरंजन क्लब , साहित्य परिषदें तथा धार्मिक क्षेत्र में मंदिर , मस्जिद और गुरुद्वारे , चर्च आदि इनके उदाहरण हैं । गैर व्यापारिक संस्थाओं में उन व्यक्तियों को भी सम्मिलित किया जाता है जो अपनी सेवाओं को उपलब्ध कराकर आय अर्जित करते हैं । ऐसे व्यक्तियों को पेशेवर व्यक्ति ( Professional persons ) कहते हैं । जैसे वकील , डॉक्टर , इन्जीनियर , प्रोफेसर , अंकेक्षक आदि ।

Comments

Popular posts from this blog

प्राप्ति - भुगतान खाते की विशेषताएँ ( Characteristics of Receipts and Payments Account )

प्राप्ति - भुगतान खाते की विशेषताएँ  ( Characteristics of Receipts and Payments Account )  प्राप्ति - भुगतान खाते की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं -  1 . खाते का प्रकार - प्राप्ति - भुगतान खाता एक वास्तविक खाता ( Real account ) है । अत : इसमें वास्तविक खाते के नियम के अनुसार लेन - देन लिखे जाते हैं ।  2 . खाते का निर्माण - प्राप्ति - भुगतान खाते का निर्माण वित्तीय वर्ष के अन्त में किया जाता है ।  3 . पूँजीगत व आगमगत - प्राप्ति - भुगतान खाते में समस्त नगद लेन - देन चाहे वे पूँजीगत हों या आगमगत , लिखे जाते हैं ।  4 . रोकड़ बही का सारांश - प्राप्ति - भुगतान खाता रोकड बही का सारांश है तथा जिसका निर्माण रोकड़ बही के आधार पर ही किया जाता है ।  5 . खाते का शेष - प्राप्ति - भुगतान खाते का शेष सामान्यत : डेबिट होता है जो वर्ष के अन्त में संस्था में उपलब्ध रोकड़ को प्रकट करता ।  प्राप्ति - भुगतान खाता आर्थिक स्थिति का द्योतक नहीं है ( Receipts & Payment A / c does not show the economic status ) -   प्राप्ति - भुगतान खाते से किसी गैर - व्यापार...

साझेदारी संलेख ( Partnership Deed )

साझेदारी संलेख  ( Partnership Deed )  अर्थ ( Meaning ) — साझेदारी संलेख , फर्म के साझेदारों के बीच किया गया एक ऐसा अनुबन्ध या समझौता है जिसमें साझेदारी के व्यापार को चलाने की शर्तों और नियमों का उल्लेख रहता है । साझेदारी की विशेषताओं में यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि साझेदारी , फर्म के साझेदारों के मध्य अनुबन्ध है , जो कि लिखित या मौखिक हो सकता है । अनुबन्ध का लिखित होना साझेदारों के हित में होता है , क्योंकि भविष्य में होने वाले विवादों पर अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार उसका निपटारा आसानी से किया जा सकता है ।  साझेदारी संलेख की प्रमुख बातें -  साझेदारी संलेख में प्राय : निम्नलिखित बातों का स्पष्ट उल्लेख होता है -   ( i ) फर्म का नाम एवं पता । ( ii ) साझेदारों के नाम एवं पते । ( iii ) व्यवसाय का क्षेत्र एवं व्यवसाय का स्वरूप । ( iv ) साझेदारों की अवधि । ( v ) साझेदारों की पूँजी एवं प्रत्येक साझेदार का फर्म में हिस्सा । ( vi ) पूँजी लेखों को रखने की विधि । ( vii ) लाभ - हानि का अनुपात । ( viii ) साझेदारों द्वारा ऋण का लेना तथा देना । ( ix ) साझेदार द्वार...

स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता ( Memorandum Revaluation Account )

स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता ( Memorandum Revaluation Account ) - नये साझेदार के प्रवेश पर जब सभी साझेदार यह निर्णय करें कि सम्पत्ति व दायित्व अपने प्रारम्भिक मूल्य पर ही दिखाये जायेंगे अर्थात् पुनर्मूल्यांकन के बाद के मूल्य पर नहीं दिखाये जायेंगे तब स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता बनाया जाता है । यह खाता दो भागों में बँटा होता है इसके पहले भाग में पुनर्मूल्यांकन खाता की तरह लेखांकन किया जाता है तथा दूसरे भाग में पहले भाग के विपरीत दिशा में लेखे किये जाते हैं , अर्थात् जिन लेखों को पहले भाग में डेबिट किया । गया वे क्रेडिट में और जो लेखे क्रेडिट में हैं वे डेबिट में लिखे जाते हैं । इस खाते के पहले भाग का शेष पुराने साझेदारों के पुराने अनुपात में उनके पूँजी लेखों में अन्तरित किया जाता है तथा दूसरे भाग का शेष नये सहित सभी साझेदारों के उनके नये अनुपात में अन्तरित कर दिया जाता है ।