घटती शेष पद्धति के गुण ( Merits of Reducing Balance Method )
घटती शेष पद्धति के प्रमुख गुण निम्नानुसार हैं -
1 . गणना में सरलता - हास की गणना की दृष्टि से यह पद्धति अत्यन्त सरल है । इस पद्धति अनुसार निर्धारित की गई ह्रास की दर अपरिवर्तित रहती है फलस्वरूप ह्रास की गणना में कोई कठिनाई नहीं होती ।
2 . उपयोगिता के अनुसार ह्रास - इस पद्धति का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसमें सम्पत्ति की उपयोगिता अथवा उसकी कार्यक्षमता के अनुसार प्रतिवर्ष ह्रास की राशि अपलिखित की जा सकती है । सम्पत्ति की कार्यक्षमता घटने के साथ - साथ उस पर लिखी जाने वाली ह्रास की राशि भी घटती जाती है ।
3 . लाभ - हानि खाते पर समान भार - इस पद्धति अनुसार किसी भी स्थायी सम्पत्ति पर लिखी जाने वाली ह्रास की राशि प्रारम्भिक वर्षों में अधिक होती है और सम्पत्ति पर की जाने वाली मरम्मत आदि का व्यय भार कम रहता है । किन्तु जैसे - जैसे सम्पत्ति पुरानी होती है वैसे - वैसे मरम्मत आदि का व्यय बढ़ते जाता है और इन वर्षों में हास की राशि घटती जाती है । मरम्मत का व्यय औरह्रास दोनों में संतुलन स्थापित हो जाने से सम्पत्ति पर लिखे जाने वाले व्ययों का प्रतिवर्ष लाभ - हानि खाते पर पड़ने वाला भार समान होता है ।
4 . अधिक लागत वाली सम्पत्तियों के लिए उपयुक्त - यह पद्धति दीर्घ जीवनकाल तथा अधिक लागत वाली स्थायी सम्पत्तियों पर ह्रास के आयोजन के लिए उपयुक्त है । बड़े उद्योगों में सम्पत्तियों पर ह्रास की गणना इस पद्धति अनुसार ही की जाती है ।
5 . आयकर द्वारा मान्य - यह पद्धति व्यावहारिक दृष्टि से अधिक उपयोगी होने के कारण इसे आयकर विधान द्वारा मान्य किया गया है ।
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