साझेदारी के विघटन का अर्थ ए ( Meaning of Dissolution of Partnership )
साझेदारी के विघटन से तात्पर्य फर्म का व्यवसाय बन्द कर उसकी समाप्ति से है । साझेदारी के विघटन को साझेदारी का समापन या साझेदारी का विसर्जन भी कहते हैं । विघटन के कारण साझेदारों के परस्पर सम्बन्ध समाप्त हो जाते हैं । भारतीय साझेदारी अधिनियम , 1932 की व्यवस्थाओं के अनुसार विघटन के दो रूप हो सकते हैं - एक साझेदारी का विघटन और दूसरा फर्म का विघटन । साझेदारी के समापन से फर्म का समापन नहीं होता , किन्तु फर्म के विघटन हो जाने पर साझेदारी का विघटन हो जाता है । किसी नये साझेदार के प्रवेश पर , किसी साझेदार के अवकाश ग्रहण पर या किसी साझी की मृत्यु की दशा में पुरानी साझेदारी समाप्त हो जाती है , किन्तु फर्म का विघटन नहीं होता अपितु नयी साझेदारी की स्थापना कर फर्म को चालू रखा जाता है । अतः सामान्यतः साझेदारी के विघटन से आशय फर्म के ही विघटन से है । विघटन पर फर्म की समस्त सम्पत्तियों का विक्रय कर दिया जाता है तथा प्राप्त राशि से दायित्वों का भुगतान करने के पश्चात् शेष राशि सभी साझेदारों में वितरित कर दी जाती है ।
साझेदारी के समापन और फर्म के समापन में अन्तर ( Difference between dissolution onpat and dissolution of partnership firm )
साझेदारी के समापन और साझेदारी फर्म के समापन में निम्नानुसार भेद किया जा सकता है -
अन्तर का आधार
1 . साझेदारों के आपसी सम्बन्ध
2 . व्यापार की स्थिति
3 . समापन की अनिवार्यता
4 . फर्म की संपत्तियों का वितरण
साझेदारी का समापन
इस समापन में सभी साझेदारों के आपसी सम्बन्ध टूटते नहीं हैं ।
इस समापन में फर्म का व्यापार चलता रहता है ।
साझेदारी के समापन पर फर्म का समा - पन अनिवार्य नहीं है ।
साझेदारी के विघटन पर केवल बहि - र्गामी साझेदार को उसके भाग का भुग - तान फर्म की संपत्तियों से किया जाता
साझेदारी फर्म का समापन
इसमें सभी साझेदारों के आपसी सम्बन्ध टूट जाते हैं ।
इस समापन से फर्म का व्यवसाय बन्द हो जाता है ।
फर्म के समापन पर साझेदारी भी अनिवार्य रूप से समाप्त हो जाती है । फर्म की समस्त संपत्तियों का विक्रय कर बाह्य दायित्वों का भुगतान किया जाता है तदुपरांत शेष का वितरण समस्त साझेदारों के मध्य किया जाता हैं |
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