मूल्यह्रास का अर्थ
( Meaning of Depreciation )व्यवसाय के सुव्यवस्थित संचालन में विभिन्न प्रकार की अचल सम्पत्तियों का उपयोग किया जाता है । अचल सम्पत्तियों में संयंत्र , भवन , उपस्कर , मोटरगाड़ी आदि प्रमुख हैं । प्रारम्भ में इन सम्पत्तियों को स्थापित करने के लिए जो कीमत देनी पड़ती है , कुछ समय उपयोग के बाद इनके विक्रय से उतनी राशि प्राप्त नहीं होती ; क्योंकि निरन्तर प्रयोग से या अन्य किसी कारण से सम्पत्तियों के मूल्य में स्थायी कमी आ जाती है — यही कमी मूल्यह्रास है ।
मूल्यह्रास की परिभाषा ( Definition of Depreciation )
मूल्यहास की परिभाषा विभिन्न विद्वानों ने निम्न प्रकार दी है —
1 . कार्टर के अनुसार , " एक सम्पत्ति के मूल्य में किसी भी कारण से होने वाली शनै : - शनैः तथा स्थायी कमी को ह्रास कहते हैं ।
2 . बाटलीबॉय के अनुसार , " यह एक साधारण ज्ञान की बात है कि सभी स्थायी सम्पत्तियाँ जैसे — प्लाण्ट , मशीन , भवन , फर्नीचर आदि जैसे - जैसे पुरानी होती जाती हैं , उनके मूल्य में कमी आती जाती है और वे व्यापार में लगातार उपयोग करने से बेकार हो जाती हैं । यही कमी हास है । "
3 . स्पाइलर एवं पेगलर के अनुसार , " हास को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है , " यह सम्पत्ति के क्रियात्मक जीवन की समाप्ति का माप है जो एक निश्चित समय में किसी भी कारण से हुई हो । "
4 . हेराल्ड जे . ह्वेल्डन के अनुसार , " जो पूँजी भवन , प्लाण्ट व मशीन आदि सम्पत्तियों में लगाई जाती है , उसमें उन सम्पत्तियों के जीवनकाल में जो हानि होती है उसे ह्रास या अवक्षयण कहा जाता है । यह शब्द प्रयोग द्वारा शनैः - शनैः और अवश्य होने वाली हानि को प्रकट करता है |"
5 . आर्थर कोल्स के मतानुसार , " हास का आशय व्यापारिक जगत में मूल्य में कमी आने से है । यह कमी कई कारणों से हो सकती है । "
6 . मनरो के शब्दों में , " घिसावट स्थायी सम्पत्ति को लागत के उस भाग को बताता है जो कभी वापस पाने योग्य नहीं होता , जब सम्पत्ति को अन्तिम रूप से हटा दिया जाता है । "
सरल शब्दों में “ स्थायी सम्पत्ति के मूल्य में निरन्तर प्रयोग अथवा अन्य किसी कारण से धीरे - धीरे होने वाली स्थायी कमी ही मूल्यहास है । इसे अवक्षयण , घटौती या घिसारा भी कहते हैं । "
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