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ख्याति ( Goodwill )

ख्याति ( Goodwill ) 

अर्थ ( Meaning ) - ख्याति को शब्दों की सीमा में नहीं बाँधा जा सकता । ख्याति की व्याख्या करना एक कठिन कार्य है , क्योंकि ख्याति के सम्बन्ध में कानूनवेत्ता तथा लेखाशास्त्रियों ने समय - समय पर इसकी भिन्न भिन्न परिभाषा दी है । सामान्यत : ख्याति एक ऐसा लाभ है जिसे कोई फर्म अपने सद्व्यवहार , उत्तम माल , उच्चकोटि की सेवाओं , कम मुल्य एवं ईमानदारी , व्यावसायिक सम्बन्ध एवं उज्जवल भविष्य आदि के कारण प्राप्त कर सकता है । 

ख्याति व्यापार की सम्पत्ति होती है , जो कि फर्म को अपने साझेदारों की व्यक्तिगत साख , उनका माल का विक्रय करने का तरीका , एकाधिकारी लाभ , अधिक वस्तु की पूर्ति , व्यापारिक चिन्ह , निरन्तर विज्ञापन तथा कर्मचारियों की कार्यकुशलता के कारण प्राप्त होती है । ख्याति का लेखा फर्म के संगठन में परिवर्तन या किसी व्यापार को खरीदने अथवा बेचने पर भी किया जाता है ।

 एक अन्य तरीके से भी ख्याति का अर्थ स्पष्ट किया जा सकता है जिस फर्म का लाभ उस पर होने वाले व्ययों , जैसे — प्रबन्ध , पूँजी पर ब्याज एवं जोखिम के प्रतिफल के बराबर होता है , उसे सीमान्त फर्म कहते हैं । इसके विपरीत यदि कोई फर्म ऐसी है जिसका लाभ , उसी प्रकार की परिस्थितियों में काम करने वाली सीमान्त फर्म से अधिक होता है तो इस लाभ को अतिरिक्त लाभ कहा जाता है । इस अतिरिक्त लाभ को कमाने की क्षमता ' ख्याति ' कहलाती है ।

परिभाषाएँ - विभिन्न विद्वानों ने ख्याति की परिभाषा दी है , कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्नानुसार हैं - 

लार्ड एल्डन ( Lord Eldon ) - " ख्याति इस सम्भावना के अतिरिक्त और कुछ नहीं है कि पुराने ग्राहक पुराने स्थान से सम्बन्ध बनाये रखें ।

 ” प्रो . डिक्सी ( Prof . Dicksee ) - " जब तक एक व्यक्ति ख्याति के लिए कुछ राशि देता है , तो वह राशि इसलिए देता है कि ऐसा करने से वह इतनी अधिक आमदनी प्राप्त करेगा जितनी कि वह इसके बिना प्राप्त नहीं कर सकता था ।

 " जे . ओ . मागी ( J . O . Magi ) — “ भविष्य में लाभार्जन करने की क्षमता ही ख्याति है । "

 मेकनॉटन ( Macnaughten ) - " ख्याति वह वस्तु है , जिसका वर्णन करना आसान है , परन्तु परिभाषित करना कठिन है । यह वह लाभ है जिसे एक व्यापार अच्छे नाम , प्रसिद्धि तथा अच्छे व्यावसायिक सम्बन्धों के कारण प्राप्त करता है । यह वह आकर्षण शक्ति है जो ग्राहकों को अपनी ओर खींचती है । एक ऐसी वस्तु हे जा पराने स्थापित व्यापार को एक नये व्यापार से अलग करती है । 

" स्टोरी ( Storie ) - “ यह किसी व्यापारिक संस्थान द्वारा लगायी गयी पूँजी की तुलना में अधिक प्राप्त होने वाला लाभ है ।

 ” अत : सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि ख्याति किसी व्यवसाय का वह गुण है जो एक समान व्यवसाय में सामान्य लाभ की तुलना में अधिक लाभ अर्जित करने की क्षमता प्रदान करता है । 

ख्याति की विशेषताएँ ( Characteristics of Goodwill ) उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर ख्याति के निम्नलिखित लक्षण होते हैं -

 ( i ) ख्याति व्यवसाय की सम्पत्ति है क्योंकि व्यवसाय के लाभ में वृद्धि करने हेतु यह सहायक होती है ।

 ( ii ) ख्याति व्यवसाय की एक अमूर्त अदृश्य सम्पत्ति है क्योंकि यह भवन , मशीन आदि सम्पत्तियों की तरह दिखाई नहीं देती । 

( iii ) ख्याति एक विक्रय करने योग्य सम्पत्ति है क्योंकि ख्याति का मूल्यांकन किया जा सकता है अत : ख्याति का क्रय - विक्रय संभव है । 

( iv ) ख्याति पर अन्य सम्पत्तियों की भाँति ह्रास की गणना नहीं की जाती ।

 ( v ) ख्याति के मूल्य में कमी या वृद्धि हो सकती है ।


ख्याति उत्पन्न होने के कारण ( Causes of Raising Goodwill )

 ख्याति व्यवसाय को अनेक कारणों से प्राप्त होती है , प्रमुख कारण निम्नानुसार हैं - 

1 . व्यापार की स्थिति - यदि व्यापार ऐसे स्थान पर स्थित हो जहाँ ग्राहकों को आने - जाने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो तथा जो शहर के प्रमुख स्थान , बाजार या चौराहे पर स्थित हो , तो व्यापार शीघ्र ही ख्याति अर्जित कर लेता है । 

2 . अच्छा माल तथा उचित कीमत — जो व्यापारी ग्राहकों को अच्छे माल की पूर्ति करता है तथा माल उचित मूल्य पर प्रदान पर प्रदान करता है तथा मिलावट आदि नहीं करता है तो ऐसे व्यापारी पर ग्राहकों का विश्वास उत्पन्न हो जाता है , जिससे उस व्यवसायी की ख्याति में वृद्धि हो जाती है । 

 3 . साझेदारों की व्यक्तिगत ख्याति – साझेदारों की निजी ख्याति , व्यक्तित्व तथा सम्बन्ध एवं मिलनसारिता , मधुर स्वभाव ईमानदारी आदि के कारण भी फर्म की ख्याति में वृद्धि होती है ।

 4 . विज्ञापन उत्पादित वस्तुओं का लगातार विज्ञापन करने से भी फर्म ख्याति अर्जित कर सकने में समर्थ हो जाती है । 

5 . सन्तुष्ट कर्मचारी - फर्म में कार्य करने वाले कर्मचारी यदि सन्तुष्ट हैं , तो वे भी व्यापार की ख्याति की वृद्धि सहायक होते हैं । 

6 एकाधिकार — एकाधिकार से फर्म की ख्याति में वृद्धि होती है , क्योंकि ग्राहकों को ऐसी दुकान पर बार - बार वस्तुएँ खरीदने हेतु आना पड़ता है जिससे ख्याति में वृद्धि होती है । 

7 ट्रेडमार्क , पेटेण्ट या प्रसिद्ध व्यापार नाम - शासन द्वारा फर्म को कुछ आवश्यक वस्तुओं के निर्माण का एकाधिकार तथा विशेष सुविधाएँ देने के कारण भी व्यापार की ख्याति में वृद्धि होती है । 

8 . वैधानिक प्रतिबन्धों से मुक्ति – जहाँ व्यापार वैधानिक प्रतिबन्धों से मुक्त रहता है , व्यापार का संचालन सही ढंग से होता है . तो व्यापार शीघ्र ही ख्याति अर्जित कर लेता है ।


ख्याति के भेद  ( Kinds of Goodwill ) 

ख्याति व्यापार की अमूर्त सम्पत्ति है , जिसे न देखा जा सकता है और न ही इसका कोई आकार होता है । ख्याति का वर्गीकरण करना कठिन है किन्तु हस्तान्तरण के दृष्टिकोण से ख्याति को तीन भागों में बाँटा जा सकता हैं -


1 . बिल्ली के स्वभाव की ख्याति ( Cat Goodwill ) - बिल्ली सदैव उस स्थान को अधिक महत्व देती है जहाँ वह रहती है न कि उस व्यक्ति को जिसके साथ वह रहती है । स्वामी द्वारा स्थान परिवर्तन कर देने पर भी बिल्ली अपना पुराना स्थान नहीं छोड़ती । इसी प्रकार कुछ ग्राहक ऐसे होते हैं जो अपने पुराने व्यवसाय से अपना सम्बन्ध बनाये रखते हैं , चाहे फिर उस व्यवसाय का स्वामी कोई भी व्यक्ति हो । अत : व्यवसाय की ऐसी ख्याति जो व्यवसाय के स्थान के कारण उत्पन्न होती है , बिल्ली के स्वभाव वाली ख्याति कही जाती है । इसे स्थानीय ख्याति भी कहा जाता है । बाजारों में , चौराहों पर स्थित व्यवसायों को इस प्रकार की ख्याति का लाभ प्राप्त होता है । वर्तमान में स्थानीय ख्याति का मूल्य सर्वाधिक है । 

2 . कुत्ते के स्वभाव की ख्याति ( Dog Goodwill ) - कुत्ता कभी भी अपने स्वामी का साथ नहीं छोड़ता वह सदैव स्वामी के पीछे - पीछे चलता है । जहाँ भी स्वामी जाता है कुत्ता स्वामी के साथ ही रहता है । इस प्रकार कुछ ग्राहक ऐसे भी होते हैं जिनका व्यवसाय के स्वामी से उसकी व्यवहार कुशलता के कारण लगाव - सा हो जाता है फलत : वे उस व्यवसाय के स्वामी से अपना सम्बन्ध बनाए रखते हैं । व्यवसाय का स्थान यदि स्वामी परिवर्तित करता है तो ऐसे ग्राहक भी उस परिवर्तित स्थान पर जाना पसंद करते हैं । इस प्रकार की ख्याति को व्यक्तिगत गणों पर आधारित ख्याति भी कहा जाता है । इस प्रकार की ख्याति विशेषकर डॉक्टर , वकील चार्टड एकाउण्टैण्ट आदि पेशेवर व्यक्तियों में देखने को मिलती है । इस प्रकार की ख्याति हस्तान्तरणीय न होने से इसका मूल्य भी स्थानीय ख्याति की तुलना में बहुत कम होता है । 

3 . चूहे के स्वभाव वाली ख्याति ( Rat Goodwill ) — चूहे को किसी विशेष स्थान अथवा व्यक्ति से किसी तरह का कोई लगाव नहीं होता । इसी प्रकार कुछ ग्राहक ऐसे भी होते हैं जिनका लगाव न तो व्यवसाय के स्थान से होता है और न व्यवसाय के स्वामी से । ऐसे ग्राहक कभी भी किसी एक व्यवसाय विशेष के नहीं होते वरन् ये समयानुसार स्थान परिवर्तित करते रहते हैं । अत : जिस व्यवसाय में ऐसे ग्राहकों की संख्या अधिक रहती है उस व्यवसाय की ख्याति का मूल्य शून्य होता है ।


ख्याति के मूल्यांकन की विधियाँ ( Methods of Valuation of Goodwill ) 

ख्याति एक अमूर्त सम्पत्ति होती है , इसका सही - सही मूल्यांकन करना एक कठिन कार्य है , इसलिए प्रायः ख्याति के मूल्यांकन के सम्बन्ध में साझेदारी संलेख में मूल्यांकन की विधि या मूल्य का उल्लेख कर दिया जाता है । ख्याति प्रायः व्यापार की प्रकृति तथा अन्य बातों पर निर्भर करती है । व्यापार का लाभ बढ़ने से ख्याति का मूल्य बढ़ जाता है तथा कमी होने पर ख्याति का मूल्य भी कम हो जाता है । ख्याति के मूल्यांकन की निम्नलिखित विधियाँ प्रचलित हैं - 

 1 . औसत लाभ विधि ( Average Profit Method ) — यह ख्याति के मूल्यांकन की सरल एवं व्यावहारिक विधि है । विधिनुसार सर्वप्रथम फर्म का औसत लाभ ज्ञात किया जाता है तथा इसके बाद ज्ञात किये गये औसत लाभ में एक सम्मत संख्या या संलेखानुसार निश्चित की गई संख्या से गुणा कर ख्याति का मूल्य निकाला जाता है ।

2 . अधिलाभ विधि ( Superprofit Method ) - इस विधि के अनुसार सर्वप्रथम अधिलाभ ज्ञात किया जाता है । अधिलाभ से आशय अधिक लाभ से है । जब कोई फर्म सामान्य औसत लाभ की तुलना में अधिक लाभ अर्जित करती है तो लाभ के इस आधिक्य को ही अधिलाभ कहा जाता है । अधिलाभ में सम्मत संख्या का गुणा कर ख्याति का मूल्य निकाला जाता है । ख्याति का मूल्य ज्ञात करते समय निम्नलिखित सूत्र प्रयोग में लाये जा सकते हैं |


ख्याति के मूल्यांकन की आवश्यकता ( Need for Valuing Goodwill )

 एक साझेदारी फर्म में ख्याति के मूल्यांकन की आवश्यकता निम्नलिखित परिस्थितियों में होती है -
 ( i ) जब फर्म में किसी नये व्यक्ति को साझेदार बनाया जाता है । 

( ii ) जब फर्म का कोई साझेदार फर्म से अवकाश ग्रहण करता है या किसी साझेदार की मृत्यु हो जाती है ।

 ( iii ) जब फर्म में साझेदारों के लाभ - हानि विभाजन अनुपात में परिवर्तन किया जाता है ।

 ( iv ) जब साझेदारी व्यवसाय की बिक्री की जाती है । ( v ) जब साझेदारी फर्मों का एकीकरण किया जाता है । 

( vi ) जब साझेदारी फर्म को कम्पनी के रूप में परिवर्तित किया जाता है ।

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