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त्याग अनुपात और लाभ - प्राप्ति अनुपात में अन्तर ( Difference between Sacrificing Ratio and Gaining Ratio )

त्याग अनुपात और लाभ - प्राप्ति अनुपात में अन्तर ( Difference between Sacrificing Ratio and Gaining Ratio )

अन्तर का आधार

 1 . आशय 
2 . गणना का समय
3 . आवश्य - कता 
4 . अनुपात में कमी या वृद्धि 
5 . गणना विधि

त्याग अनुपात 

नये साझेदार के पक्ष में पुराने साझेदार अपने - अपने हिस्से का जिस अनुपात में त्याग करते हैं उस अनुपात को त्याग अनु पात कहा जाता है ।

 त्याग अनुपात की गणना किसी नये साझे - दार के प्रवेश पर की जाती है |

 पुराने साझेदार नये साझेदार से ख्याति का भुगतान प्राप्त करते हैं । यह भुगतान वे उसी अनुपात में प्राप्त करते हैं जिस अनुपात में उन्होंने अपने हिस्से का त्याग किया है ।

 त्याग अनुपात से पुराने साझेदारों का लाभ हानि अनुपात कम हो जाता है ।

 पुराने अनुपात से नया अनुपात घटाकर त्याग अनुपात ज्ञात किया जाता है । पुराना अनुपात - नया अनुपात = त्याग अनुपात होता है । ) ख्याति


लाभ - प्राप्ति अनुपात 

किसी साझेदार के अवकाश ग्रहण करने या मृत्यु हो जाने पर शेष साझेदारों के लाभ के हिस्सों में वृद्धि हो जाती है । जिस अनपात में यह वृद्धि होती है उस अनुपात को लाभ प्राप्ति अनुपात कहा जाता है ।

 लाभ - प्राप्ति का अनुपात किसी साझेदार के अवकाश ग्रहण करने अथवा मृत्यु हो जाने पर ज्ञात किया जाता है । 

अवकाश प्राप्त या मृतक साझेदार के हिस्से की ख्याति का समायोजन करने के लिए लाभ प्राप्ति अनुपात ज्ञात करना आवश्यक होता है ।

 लाभ - प्राप्ति अनुपात से शेष साझेदारों के अनु पात में वृद्धि होती है । 

नये अनुपात से पुराना अनुपात घटाकर लाभ प्राप्ति अनुपात ज्ञात किया जाता है । नया अनुपात – पुराना अनुपात = लाभ - प्राप्ति अनुपात होता है ।

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