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घटती शेष पद्धति के दोष ( Demerits of Reducing Balance Method )

घटती शेष पद्धति के दोष
 ( Demerits of Reducing Balance Method )

घटती शेष पद्धति के प्रमुख दोष निम्नानुसार हैं - 

1 . गणना क्रिया में वृद्धि - घटती शेष पद्धति में प्रतिवर्ष ह्रास की गणना सम्पत्ति के घटे हुए मूल्य पर करनी पड़ती है । परिणामस्वरूप गणना क्रिया में वृद्धि होती है । 

2 . ह्रास की ऊँची दर - इस पद्धति में ह्रास की दर ऊँची रखनी पड़ती है , इसके अभाव में सम्पत्ति के जीवनकाल में उसके मूल्य को अपलिखित नहीं किया जा सकता । 

3 . सम्पत्ति के मूल्य को शून्य तक अपलिखित नहीं किया जा सकता - स्थायी किस्त पद्धति की तरह , इस पद्धति में सम्पत्ति के मूल्य को शून्य तक अपलिखित नहीं किया जा सकता । सम्पत्ति के बेकार हो जाने के बाद भी सम्पत्ति खाते में शेष बना रहता है ।

 4 . लाभ - हानि ज्ञात करने में कठिनाई – यदि सम्पत्ति को वर्ष के मध्य बेच दिया जाता है तो इस बेची गई सम्पत्ति पर ह्रास निकालने व लाभ - हानि ज्ञात करने में कठिनाई होती है ।

 5 . ह्रास कोष की व्यवस्था नहीं - किसी सम्पत्ति के बेकार हो जाने पर इस पद्धति में ह्रास कोष की व्यवस्था न होने के कारण नई सम्पत्ति को स्थापित करने में कोष की समस्या उपस्थित हो जाती है ।

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