Skip to main content

घटती शेष पद्धति की विशेषताएँ ( Characteristics of Reducing Balance Method )

घटती शेष पद्धति की विशेषताएँ ( Characteristics of Reducing Balance Method )

घटती शेष पद्धति की विशेषताएँ इस प्रकार हैं - 

1 . इस पद्धति की मुख्य विशेषता है कि इसमें प्रतिवर्ष ह्रास की राशि घटती जाती है । 
2 . इस पद्धति अनुसार ह्रास की गणना प्रतिवर्ष सम्पत्ति के प्रारम्भिक शेष पर की जाती है ।
3 . इस पद्धति अनुसार सम्पत्ति के मूल्य को शून्य तक अपलिखित नहीं किया जा सकता । 
4 . इस पद्धति में ह्रास की दर ऊँची रखी जाती है । 
5 . यह पद्धति आयकर विधान द्वारा मान्य है ।

Comments

Popular posts from this blog

प्राप्ति - भुगतान खाते की विशेषताएँ ( Characteristics of Receipts and Payments Account )

प्राप्ति - भुगतान खाते की विशेषताएँ  ( Characteristics of Receipts and Payments Account )  प्राप्ति - भुगतान खाते की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं -  1 . खाते का प्रकार - प्राप्ति - भुगतान खाता एक वास्तविक खाता ( Real account ) है । अत : इसमें वास्तविक खाते के नियम के अनुसार लेन - देन लिखे जाते हैं ।  2 . खाते का निर्माण - प्राप्ति - भुगतान खाते का निर्माण वित्तीय वर्ष के अन्त में किया जाता है ।  3 . पूँजीगत व आगमगत - प्राप्ति - भुगतान खाते में समस्त नगद लेन - देन चाहे वे पूँजीगत हों या आगमगत , लिखे जाते हैं ।  4 . रोकड़ बही का सारांश - प्राप्ति - भुगतान खाता रोकड बही का सारांश है तथा जिसका निर्माण रोकड़ बही के आधार पर ही किया जाता है ।  5 . खाते का शेष - प्राप्ति - भुगतान खाते का शेष सामान्यत : डेबिट होता है जो वर्ष के अन्त में संस्था में उपलब्ध रोकड़ को प्रकट करता ।  प्राप्ति - भुगतान खाता आर्थिक स्थिति का द्योतक नहीं है ( Receipts & Payment A / c does not show the economic status ) -   प्राप्ति - भुगतान खाते से किसी गैर - व्यापार...

साझेदारी संलेख ( Partnership Deed )

साझेदारी संलेख  ( Partnership Deed )  अर्थ ( Meaning ) — साझेदारी संलेख , फर्म के साझेदारों के बीच किया गया एक ऐसा अनुबन्ध या समझौता है जिसमें साझेदारी के व्यापार को चलाने की शर्तों और नियमों का उल्लेख रहता है । साझेदारी की विशेषताओं में यह पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि साझेदारी , फर्म के साझेदारों के मध्य अनुबन्ध है , जो कि लिखित या मौखिक हो सकता है । अनुबन्ध का लिखित होना साझेदारों के हित में होता है , क्योंकि भविष्य में होने वाले विवादों पर अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार उसका निपटारा आसानी से किया जा सकता है ।  साझेदारी संलेख की प्रमुख बातें -  साझेदारी संलेख में प्राय : निम्नलिखित बातों का स्पष्ट उल्लेख होता है -   ( i ) फर्म का नाम एवं पता । ( ii ) साझेदारों के नाम एवं पते । ( iii ) व्यवसाय का क्षेत्र एवं व्यवसाय का स्वरूप । ( iv ) साझेदारों की अवधि । ( v ) साझेदारों की पूँजी एवं प्रत्येक साझेदार का फर्म में हिस्सा । ( vi ) पूँजी लेखों को रखने की विधि । ( vii ) लाभ - हानि का अनुपात । ( viii ) साझेदारों द्वारा ऋण का लेना तथा देना । ( ix ) साझेदार द्वार...

स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता ( Memorandum Revaluation Account )

स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता ( Memorandum Revaluation Account ) - नये साझेदार के प्रवेश पर जब सभी साझेदार यह निर्णय करें कि सम्पत्ति व दायित्व अपने प्रारम्भिक मूल्य पर ही दिखाये जायेंगे अर्थात् पुनर्मूल्यांकन के बाद के मूल्य पर नहीं दिखाये जायेंगे तब स्मरण पुनर्मूल्यांकन खाता बनाया जाता है । यह खाता दो भागों में बँटा होता है इसके पहले भाग में पुनर्मूल्यांकन खाता की तरह लेखांकन किया जाता है तथा दूसरे भाग में पहले भाग के विपरीत दिशा में लेखे किये जाते हैं , अर्थात् जिन लेखों को पहले भाग में डेबिट किया । गया वे क्रेडिट में और जो लेखे क्रेडिट में हैं वे डेबिट में लिखे जाते हैं । इस खाते के पहले भाग का शेष पुराने साझेदारों के पुराने अनुपात में उनके पूँजी लेखों में अन्तरित किया जाता है तथा दूसरे भाग का शेष नये सहित सभी साझेदारों के उनके नये अनुपात में अन्तरित कर दिया जाता है ।