मूल्यह्रास की गणना ( Calculation of Depreciation )
घटती शेष पद्धति में हास की गणना प्रतिशत दर अनुसार प्रतिवर्ष सम्पत्ति खाते के प्रारम्भिक शेष पर की जाती है । अत : वार्षिक हास ज्ञात करते समय निम्नांकित बातों पर ध्यान देना आवश्यक है -
1 . सम्पत्ति के क्रय वर्ष में ह्रास की गणना - जिस वर्ष सम्पत्ति खरीदी जाती है उस वर्ष में वार्षिक हास की गणना सम्पत्ति की मूल लागत पर की जाती है ।
2 . क्रय वर्ष के बाद आने वाले वर्षों में हास की गणना - क्रय वर्ष के बाद आने वाले वर्षों में वार्षिक ह्रास की गणना सम्पत्ति के घटे हुए मूल्य अर्थात् सम्पत्ति खाते के प्रारम्भिक शेष पर की जाती है ।
3 . ह्रास की दर के साथ “ वार्षिक ” या “ प्रतिवर्ष " शब्द के होने या न होने पर ह्रास की गणना घटती शेष पद्धति में ह्रास की दर के साथ वार्षिक या प्रतिवर्ष ( Per annum ) शब्द का होना या न होना ह्रास गणना को प्रभावित करता है । इस शब्द के महत्व को ध्यान में रखकर वर्ष के मध्य में खरीदी अथवा बेची जाने वाली सम्पत्तियों पर हास की गणना निम्नानुसार की जाती है -
( i ) ह्रास की दर के साथ वार्षिक ( Per annum ) शब्द के होने पर - वर्ष के मध्य क्रय की गई अथवा बेची गई सम्पत्तियों पर उतने ही दिनों का ह्रास लगाया जाता है जितने दिन सम्पत्ति को उस वर्ष प्रयोग में लाया गया है । जैसे - 31 दिसम्बर को समाप्त वर्ष में एक सम्पत्ति 1 जुलाई को क्रय की गई तथा एक पुरानी सम्पत्ति को बेच दिया गया है तो क्रय की गई सम्पत्ति पर 1 जुलाई से 31 दिसम्बर तक तथा बेची गयी सम्पत्ति पर । जनवरी से 30 जून तक अर्थात् 6 - 6 माह का ह्रास लगाया जावेगा क्योंकि दोनों सम्पत्तियाँ उस वर्ष क्रमश : 6 माह प्रयोग में लाई गयी हैं ।
( ii ) ह्रास की दर के साथ वार्षिक ( Per annum ) शब्द के न होने पर - हास की दर के साथ यदि वार्षिक शब्द नहीं है तो
( a ) वर्ष के मध्य क्रय की गई सम्पत्ति पर सम्बन्धित वर्ष में पूरे वर्ष का हास लिखा जाता है । किन्तु
( b ) वर्ष के मध्य में बेची गई सम्पत्ति पर कोई भी ह्रास नहीं लगाया जाता ।
अत : ह्रास की दर के साथ वार्षिक या प्रतिवर्ष या सालाना शब्द है तो वर्ष के मध्य खरीदी अथवा बेची जाने वाली सम्पत्ति पर सम्बन्धित वर्ष में उपयोग अवधि का ह्रास लगाया जाता है , किन्तु क्रय तिथि या विक्रय तिथि की जानकारी भी आवश्यक है ।
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