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4 . सम्पत्तियों एवं दायित्वों का पुनर्मूल्यांकन ( Revaluation of Assets and Liabilities )

4 . सम्पत्तियों एवं दायित्वों का पुनर्मूल्यांकन ( Revaluation of Assets and Liabilities ) 

जिस तिथि पर नये साझेदार का फर्म में प्रवेश होता है उस तिथि पर फर्म की सम्पत्तियों एवं दायित्वों का नवीन मूल्य के अनुसार समायोजन करना प्रवेश करने वाले एवं पुराने सभी साझेदारों के हित में होता है | सम्पत्तियों एवं दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन से कुछ सम्पत्तियों के मूल्य घट जाते हैं तो कुछ दायित्व बढ़ जाते हैं । इसी तरह कुछ सम्पत्तियों के मूल्य बढ़ जाते हैं तो कुछ दायित्वों के मूल्यों में कमी आ जाती है । जब कभी सम्पत्ति के मूल्य में कमी व दायित्व में वृद्धि होती है तो फर्म को हानि होती है और जब कभी सम्पत्ति के मूल्य में वृद्धि व दायित्वों में कमी हो तो फर्म को लाभ होता है । इस कमी या वृद्धि का लेखा करने के लिए बनाया गया खाता ही पुनर्मूल्यांकन खाता ( Revaluation A / c ) या लाभ - हानि समायोजन खाता ( Profit & Loss Adjustment A / c ) कहलाता है । इस खाते का शेष पुराने साझेदारों के पूँजी खातों में अन्तरित कर दिया जाता है ।

 नया साझी प्रवेश तिथि से ही सम्पत्तियों का हिस्सेदार बन जाता है अत : सम्पत्तियों एवं दायित्वों को उनके वास्तविक मूल्य पर दर्शाना आवश्यक हो जाता है ।

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