आय - व्यय खाता
( Income - Expenditure Account )
अर्थ ( Meaning ) - व्यापारिक संस्थाएँ व्यवसाय की लाभ अथवा हानि जानने के लिए लाभ - हानि खाता बनाती हैं । इसी प्रकार गैर - व्यापारिक संस्थाएँ एक निर्धारित अवधि में उनकी आय , व्यय से अधिक है अथवा व्यय , आय से अधिक है का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आय - व्यय खाता बनाती हैं । आय - व्यय खाता , लाभ - हानि खाते का ही दूसरा नाम है , अन्तर केवल यह है कि गैर - व्यापारिक संस्थाओं का उद्देश्य लाभ अर्जित करना नहीं है , इस कारण गैर - व्यापारिक संस्थाओं द्वारा बनाये गए इस प्रकार के खाते को आय - व्यय खाता कहा जाता है ।
परिभाषा ( Definition ) - श्री डावर के अनुसार , “ आय - व्यय खाता वास्तव में लाभ - हानि खाता है परन्तु जैसा कि गैर - व्यापारिक संस्थाओं द्वारा लाभ - हानि प्रदर्शित करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती , अतः उनके खाते को आय - व्यय खाता कहा जाता है ।
बाटलीबॉय के अनुसार , “ यह एक आयगत खाता है , जो कि गैर - व्यापारिक संस्थाओं द्वारा बनाया जाता है - जैसे कि शिक्षण संस्थाएँ , अस्पताल आदि और एक निश्चित अवधि में अर्जित समस्त आय को सम्मिलित करना है । "
स्पाइसर एवं पैगलर के अनुसार , “ आय - व्यय खाता एक गैर - व्यापारिक संस्था का लाभ - हानि खाता है । इसमें आगम मदें ही होती हैं , जिसे एक अवधि के समस्त व्ययों ( चाहे उनका वास्तविक भुगतान किया गया हो या नहीं ) से नाम किया जाता है तथा समस्त आय ( चाहे वे वास्तविक रूप से प्राप्त हुई हों या नहीं ) से जमा किया जाता है । आय - व्यय खाते का अन्तिम शेष अवधि का आय का व्यय पर आधिक्य अथवा व्यय का आय पर आधिक्य जैसी भी स्थिति हो , दर्शाता है । "
अत : आय - व्यय खाते से तात्पर्य गैर - व्यापारिक संस्थाओं द्वारा वर्ष के अन्त में बनाये जाने वाले ऐसे खाते से है , जिसका मुख्य उद्देश्य एक निर्धारित अवधि की आय तथा व्यय के परिणामों को जानना है ।
आवश्यकता ( Need ) - निम्नलिखित कारणों से आय - व्यय खाता बनाने की आवश्यकता उत्पन्न होती है -
( i ) रोकड़ - बही अथवा प्राप्ति एवं भुगतान खाते से एक विशेष अवधि की आय - व्यय के परिणामों को प्राप्त करना सम्भव नहीं है ।
( ii ) एक विशेष अवधि में विभिन्न स्रोतों से प्राप्त की गई आय तथा विभिन्न मदों पर किये गए व्ययों की सम्पूर्ण जानकारी आय - व्यय खाता बनाकर ही प्राप्त की जा सकती है ।
( ii ) संस्था की आर्थिक स्थिति की जानकारी के पूर्व उस अवधि के आय - व्यय के परिणामों को जानना आवश्यक है ।
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